बूस्टर कम से कम 80% गंभीर ओमीक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी

अधिकांश कोविड -19 टीके दो खुराक में दिए जाते हैं, जिनमें से कुछ को एकल खुराक के रूप में दिया जाता है। बूस्टर एक अतिरिक्त शॉट है जो मूल शॉट (शॉट्स) द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा के समय के साथ कम होने के बाद दिया जाता है, ताकि लोग अपनी प्रतिरक्षा के स्तर को अधिक समय तक बनाए रख सकें।

जबकि भारत अभी तक बूस्टर शॉट्स नहीं दे रहा है, संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे अन्य देशों ने अपने नागरिकों से अतिरिक्त खुराक प्राप्त करने के लिए कहा है।

मौजूदा वैक्सीन ज्यादा कारगर नहीं:

रिसर्चर्स का कहना है कि जब तक इस नए वेरिएंट के बारे में अधिक वास्तविक जानकारी इकट्ठा नहीं की जाती है, तब तक अनिश्चितता है. विशेषज्ञ अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ओमीक्रॉन कितना हल्का या गंभीर होगा.

वैक्सीन के जरिए शरीर ये सीखता है कि कोविड से कैसे लड़ना है. लेकिन वर्तमान में इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन अधिक म्यूटेटेड ओमीक्रॉन वेरिएंट का मुकाबला करने के लिए तैयार नहीं है. इसका मतलब है कि ओमीक्रॉन वेरिएंट के लिए मौजूदा वैक्सीन सही मैच नहीं हैं.

वैक्सीन के कारगर होने में आई कमी:

ओमीक्रॉन से बचने के लिए, ब्रिटेन समेत दुनियाभर में लोगों को वायरस से लड़ने के लिए बूस्टर डोज लेने की सलाह दी जा रही है. एंटीबॉडी वायरस पर चिपक जाती है और ये कोशिकाओं में प्रवेश करने एवं रूप बदलने से रोकती है.

स्टडी से मालूम चला है कि फुली वैक्सीनेटेड लोगों में इन एंटीबॉडी की वायरस को खत्म करने की क्षमता में 20 से 40 गुना तक की कमी आई है. इंपीरियल कॉलेज के प्रारंभिक कार्य का मानना है कि ओमीक्रॉन के खिलाफ वैक्सीन के कारगर होने में गिरावट होगी.

वहीं, बूस्टर डोज लगवाने के बाद डेल्टा वेरिएंट से मिलने वाली 97 फीसदी सुरक्षा की तुलना में ओमीक्रॉन वेरिएंट से 80 से 85.9 फीसदी तक सुरक्षा मिलती है.

हालांकि, इम्यून सिस्टम के अन्य हिस्से भी हैं, जैसे टी कोशिकाएं, जो कोविड से भी लड़ सकती हैं. हालांकि, स्टडी में इनके प्रभाव का आकलन नहीं किया गया है.

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